सेक्स की फीलिंग ने मरवा डाला-Hindi sex story

मेरा नाम माधवी है मैं जबलपुर की रहने वाली हूं, मेरी उम्र 24 वर्ष है। मेरे घर वाले बहुत ही पुराने ख्यालातो के है इस वजह से उन्होंने मेरा बचपन में ही बाल विवाह करवा दिया था। मैं अक्षय के साथ दो वर्षों से रह रही हूं लेकिन अक्षय और मेरा रिलेशन ठीक नहीं है, उससे मेरे घर वालों ने मेरी शादी कराई है परंतु मुझे वह बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। मैं उसके साथ जबरदस्ती अपनी जिंदगी जी रही हूं। मेरे घर वालों की इस प्रकार की मानसिकता के चलते ही मेरी शादी हुई, नहीं तो मैं अपने जीवन में कुछ करना चाहती थी परंतु जब से मेरी शादी अक्षय के साथ हुई तो मैं अपने जीवन में कुछ भी नहीं कर पा रही हूं, मैं सिर्फ अपने चूल्हे चौके तक ही सीमित रह गई हूं, उससे आगे मैं बिल्कुल भी नहीं सोच पाती क्योंकि मुझे मेरे ससुराल वाले कहीं भी बाहर नहीं जाने देते।


मैंने कई बार उनसे आग्रह किया कि मैं कॉलेज करना चाहती हूं लेकिन उन्होंने मुझे कॉलेज में भी दाखिला नहीं दिलवाया, उन्होंने कहा कि अब तुम्हारी शादी हो चुकी है तुम कॉलेज करके क्या करोगी लेकिन मेरा बहुत मन है कि मैं कॉलेज करूं। मैं अक्षय से कुछ बात कहती हूं तो वह मुझे हमेशा ही कहता है कि तुम घर का काम करो, कॉलेज पढ़ कर क्या करोगी। मैंने उससे हर बार अपनी इच्छा जताई कि मुझे कुछ करना है, मैं घर पर अकेले नहीं रह सकती लेकिन वह हर बार मुझे मना कर देता है वह कहता कि तुम्हें तो पता ही है कि हमारे घर में कितने बंदिसे हैं यदि तुम कहीं काम करोगी तो मुझे सारे रिश्तेदार बोलेंगे की अपनी पत्नी से काम करवा रहा है।
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मैं नहीं चाहता कि कोई भी मुझ पर उंगली उठाये, इस वजह से मैं तुम्हें कहीं भी काम नहीं करवाना चाहता। मैंने उससे कहा कि यदि तुम अपनी सोच इसी प्रकार की रखोगे तो शायद मैं तुम्हारे साथ ज्यादा दिनों तक नहीं रह पाऊंगी। जब भी मैं यह बात उसे कहती हूं तो वह गुस्सा हो जाता है और कभी कभार तो वह मुझ पर हाथ भी उठा देता है इसीलिए मैं बहुत ही परेशान हो गई हूं।



मैं सिर्फ अपने घर की चारदीवारी के अंदर ही बंद रह गई हूं, मुझे कई बार ऐसा लगता है कि जैसे किसी ने मुझे पिंजरे में कैद कर दिया हो और मेरा मन उड़ने का करता हो, मैं ऐसा सोचती हूं कि मैं कहीं चली जाऊं। मैं अपनी दिल की व्यथा किसी को भी नहीं बता सकती इसलिए मैं अकेले ही घुट रही हूं और बस अपनी जिंदगी काट रही हूं। इन दो वर्षों में मैंने बहुत ही परेशानियां झेली हैं, मुझे लगता है कि यदि इसी प्रकार से चमाधवी रहा तो मेरा जीवन ज्यादा समय तक नहीं चल पाएगा। जिस वक्त मेरी शादी हो रही थी उस वक्त मैंने अपने घर वालों को बहुत मना किया, मैंने उन्हें कहा कि मैं अक्षय से शादी नहीं करना चाहती मुझे अभी पढ़ाई करनी है लेकिन उन्होंने कहा कि तुम्हारा रिश्ता बचपन में ही हो गया था इसलिए तुम्हें उससे शादी करनी ही पड़ेगी। मैंने उन्हें कई बार विनती की लेकिन वह लोग बिल्कुल भी नहीं माने।

मेरे माता-पिता भी बहुत ही संकीर्ण मानसिकता के हैं और वह लोग हमेशा से यही चाहते हैं कि मैं सिर्फ अपने ससुराल में ही रहूं, जबकि मेरे भाई के प्रति उनकी ऐसी सोच नहीं है, उसे उन्होंने अच्छा पढ़ाया लिखाया है और वह एक अच्छी कंपनी में नौकरी कर रहा है लेकिन मेरे प्रति उनका नजरिया पहले से ही गलत था। वह सिर्फ मुझे अपने ऊपर एक बोझ समझते रहे इसलिए उन्होंने मेरी शादी जल्दी करवा दी। मेरे जीवन में कोई भी आशा की किरण नहीं दिख रही थी, मुझे लगने लगा कि शायद मैं अब अपने घर की चारदीवारी में ही कैद हो कर रह जाऊंगी, इससे ज्यादा मैं अब अपने जीवन में कुछ भी नहीं कर सकती। हमारे घर पर अक्षय का भाई अभय आया, अभय अक्षय का चचेरा भाई है और मुंबई में रहता है।

वह कुछ दिनों के लिए जबलपुर आया था मुझे लगा कि वह भी शायद अक्षय की तरह ही होगा लेकिन उसकी सोच उनसे अलग है क्योंकि वह बचपन से ही मुंबई में रहा है। उनका परिवार भी मुंबई में ही रहता है इसलिए वह खुले विचारों का है। मैं जब अभय से मिली तो मैं घूंघट में ही रहती थी क्योंकि वह मेरे पति से कुछ वर्ष बड़ा है लेकिन मुझे कई बार मन होता था कि मैं अभय के साथ बात करू क्योंकि जिस प्रकार की बातें अभय मेरे पति के साथ करता था वह मैं सुनती थी तो मुझे लगता था कि अभय के विचार मेरे पति से बहुत ही अलग हैं लेकिन मैं उससे बात नहीं कर सकती थी क्योंकि हमारे घर पर सब लोग रहते हैं।

एक दिन सुबह मैं अभय के लिए चाय लेकर गई तो अभय ने मुझसे बैठने का आग्रह किया, उस वक्त मेरे पति सोए हुए थे और मेरे सास-ससुर कहीं काम कर रहै थे इसीलिए मैं अभय के साथ बैठ गई। जब मैं अभय के साथ बैठी तो उसने मुझसे पहली बार बात की, जब मैंने अभय से बात की तो मुझे लगा कि शायद उसे मैं अपनी पीड़ा बता सकती हूं इसीलिए मैंने अभय से बात की। जब मैंने अभय को बताया कि मैं यह शादी नहीं करना चाहती थी लेकिन मेरे घर वालों ने जबरदस्ती मेरी शादी करवा दी,, मेरे अंदर का गुबार जैसे एक ही झटके में फूट गया हो। मैंने सारी बातें अभय को बता दी और मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरा मन बहुत हल्का हो गया हो।



अभय भी मेरे साथ ही बैठा हुआ था और वह मुझे कहने लगा कि मेरी सोच इस प्रकार की बिल्कुल भी नहीं है क्योंकि मेरा परिवार पहले से ही मुंबई में रहा है, हम लोग बहुत ही खुले विचारों के हैं। मैंने अभय से कहा कि इसीलिए तो मैंने आपसे अपने दिल की बात कही, नहीं तो मैंने आज तक किसी को भी अपने बात नहीं बताई क्योंकि यहां पर कोई भी ऐसा नहीं है जो मेरी बातों को समझ सके, यहां सब लोग पुराने ख्यालात के हैं, यदि मैं उनसे इस प्रकार की बात करूंगी तो शायद वह लोग मुझे ही गलत ठहराएंगे, इसलिए मैंने यह बात आपसे की।
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आप मुझे समझदार लगे, मुझे लगा कि शायद मेरे अंदर जो इतने दिनों से चल रहा है उसे मैं किसी को बताना चाहती हूं इसलिए मैंने आपको यह सब बात बताई। जब मैंने अभय से यह बात कही तो उसे भी लगा कि वाकई में मैं बहुत ज्यादा परेशानी में हूं। अभय मुझे पूछने लगा कि क्या आपने इस बारे में अक्षय से कभी बात नहीं की, मैंने अभय से कहा की मैंने कई बार अक्षय से बात की है परंतु उसका भी कोई फायदा नहीं हुआ, अक्षय भी अपने माता पिता की तरह ही है। वह बिल्कुल भी मेरी बातों को नहीं समझता यदि मैं उसे कभी भी इस प्रकार की बात करती हूं या अपने दिल की बात बताने की कोशिश करती हूं तो वह मुझ पर ही गुस्सा हो जाता है। वह कहता है कि तुम पढ़ लिख कर आगे क्या करोगी।

मैंने अभय से कहा कि मैं कई बार सोचती हूं कि मैं कहीं नौकरी कर लू लेकिन उसके लिए भी मेरे पति बिल्कुल तैयार नहीं है, उन्होंने आज तक मुझे कहीं भी नहीं भेजा, मैं घर से भी कहीं बाहर नहीं जाती मैं सिर्फ घर के अंदर ही कैद होकर रह गई हूं। अभय मेरी बात बड़े ध्यान से सुन रहा था और वह कहने लगा कि मैं इस बारे में अक्षय के साथ बात करूंगा। मैंने अभय से कहा आप उनसे बात करेंगे लेकिन कोई भी फायदा नहीं होने वाला है आपकी बात बेकार जाएगी इसलिए आप उनसे बात नहीं करें तो अच्छा रहेगा। कहीं वह आपसे भी दुश्मनी मोल ना ले ले क्योंकि यदि आप मेरी तरफदारी करेंगे या मेरा पक्ष रखेंगे तो वह जरूर आपसे गुस्सा हो जाएंगे इसलिए आप उनसे यह बात ना ही करें तो अच्छा रहेगा। अभय कहने लगे कि मैं उनसे जरूर बात करूंगा।

जब हम दोनों साथ में बैठे हुए थे तो मुझे अभय को देखकर बहुत ही अच्छा लग रहा था और अंदर से एक अलग ही प्रकार की सेक्स को लेकर फीलिंग जाग रही थी। मैंने अभय को अपने स्तनों को दिखाया तो वह पूरे मूड में आ चुकी थी। वह मेरे बगल में आकर बैठ गए और उन्होंने मेरी जांघ पर हाथ रख दिया जब उन्होंने मेरी जांघ पर हाथ रखा तो मुझे बड़ा ही अच्छा लगा।

वह मेरी जांघ को सहलाने लगे जैसे ही उन्होंने मेरे सलवार के अंदर अपने हाथ को डाला तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हुआ। जब उनकी उंगली मेरी योनि पर लगी तो मेरी योनि से पानी निकलने लगा उन्होंने मुझे पकड़ लिया और बिस्तर पर लेटा दिया। बिस्तर पर लेटाते ही मेरी चूत से पानी टपकने लगा और उन्होंने मेरे सारे कपड़े खोल दिए। मैं उनके सामने नंगी थी मैंने कहा कि आप जल्दी से मेरी योनि में अपने लंड को डाल दो और मेरी इच्छा को पूरा कर दो। उन्होंने जैसे ही मेरी योनि के अंदर अपने लंड को डाला तो मैं चिल्लाने लगी और बड़ी तेज दर्द होने लगा। लेकिन मुझे उस दर्द में भी मजा आ रहा था मैंने अभय से कहा कि आप मुझे बड़े अच्छे से चोद रहे हैं मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

आप जिस प्रकार से मुझे चोद रहे हैं मेरे अंदर की उत्तेजना जाग रही है उन्होंने काफी देर तक मुझे ऐसे ही चोदा। उसके बाद उन्होंने मेरी योनि के अंदर से अपने लंड को निकालते हुए मेरे मुंह के अंदर डाल दिया और मैंने उनके लंड को काफी देर तक चूसा जिससे कि उनका पानी निकालने लगा। उन्होंने मुझे अपने ऊपर लेटा दिया और मेरी बड़ी बड़ी चूतडो को अपने हाथ में पकड़ लिया। उन्होंने मुझे बड़ी तजी से झटके दिए और मैं भी अपनी चूतड़ों को उनके ऊपर हिलाए जा रही थी और मुझे भी बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जिस प्रकार से वह मुझे झटके दे रहे थे।

मेरे अंदर की गर्मी बाहर आने लगी और कुछ ही समय बाद मेरा झड़ चुका था। जैसे ही अभय का माल गिरा तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ। मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया काफी देर हम लोग ऐसे ही लेटे रहे। उसके बाद में अभय के ऊपर से उठ गई जल्दी से अपने कपड़े पहन लिए लेकिन अभय का माल अब भी मेरी योनि से टपक रहा था और मुझे बड़ा अच्छा महसूस हो रहा था।